भारत के राष्ट्रपति की सूची | List of India president | President of India list

India president | President of India list भारत के राष्ट्रपति भारत के प्रथम नागरिक होते हैं। भारत दक्षिण एशिया में स्थित एक देश है जो भारतीय उपमद्वीप में सबसे बड़ा है। भारत का आधिकारिक नाम भारत गणराज्य गणराज्य है। जैसा कि हम सबको ज्ञात है की भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ था। इसके पश्चात् 26 जनवरी 1950 को भारत देश में सविधान लागू हुआ। भारत के सविधान के अनुच्छेद  53 के अनुसार संघ की कार्यपालक शक्ति भारत के राष्ट्रपति में ही निहित हैं। भारत के राष्ट्रपति, भारत गणराज्य के कार्यपालक अध्यक्ष होते हैं। राष्ट्रपति जी के नाम से ही संघ के सारे कार्यपालक कार्य किये जाते हैं।राष्ट्रपति जी ही  भारत की तीनों सशस्त्र सेनाओं जल, थल और वायु सेना के सर्वोच्च सेनानायक भी हैं। सभी प्रकार के आपातकाल लगाने व हटाने वाला, युद्ध/शान्ति की घोषणा करने वाला होता है। 
आज हम स्वतंत्रता से वर्तमान तक भारतीय गणराज्य में चुने गए भारत के राष्ट्रपति के बारे में जानेंगे।
 

भारत के राष्ट्रपति India President

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव अनुच्छेद 55 के अनुसार आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति के द्वारा होता है। 
संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा। 
संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की समस्त कार्यपालिकीय शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, जिसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों के माध्यम से करेगा। 
संवैधानिक पद क्रम में राष्ट्रपति का पद सर्वोच्च होता है। राष्ट्रपति को देश का प्रथम नागरिक कहा जाता है।
 

भारत के राष्ट्रपति के लिए आवश्यक योग्यताएँ 

भारत के राष्ट्रपति के लिए निम्न योग्यताएँ होना आवश्यक है :
  • ऐसा कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक हो।
  • वह 35 वर्ष का हो। 
  • लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो। 
  • किसी सरकारी या लाभ के पद पर न हो। किन्तु इस सन्दर्भ में 'लाभ के पद' के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के मंत्रिपद को लाभ का पद नहीं माना जायेगा। 
  • राष्ट्रपति संसद अथवा राज्य विधानमंडल  सदस्य नहीं होगा और यदि वह इनमें से किसी का सदस्य है, तो राष्ट्रपति पद  निर्वाचित होने  पद ग्रहण की तारीख से उक्त विधायिका की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जायेगी। 
  • राष्ट्रपति पद के लिए किसी प्रत्याशी को भारत जन्म अथवा भारतीय मूल का होना आवश्यक नहीं है। सविधान के अनुसार उसे भारत का नागरिक होना चाहिए। 

भारत के राष्ट्रपति की सूची President of India list

नीचे सन 1950 से वर्तमान तक के भारत के राष्ट्रपति की सूची दी जा रही है :
  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद
    (26 जनवरी 1950-13 मई 1962)
  • डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन
    (13 मई 1962-13 मई 1967)
  • डॉ जाकिर हुसैन
    (13 मई 1967-3 मई 1969)
  • वीवी गिरी
    (मई 1969-20 जुलाई 1969 एवं 24 अगस्त 1969-24 अगस्त 1974)
  • डॉ फ़ख़रुद्दीन अली अहमद 
    (24 अगस्त 1974-11 फरवरी 1977)
  • नीलम संजीव रेड्डी
    (25 जुलाई 1977-25 जुलाई 1982)
  • ज्ञानी जैल सिंह
    (25 जुलाई 1982-25 जुलाई 1987)
  • आर वेंकटरमण
    (25 जुलाई 1987-25 जुलाई 1992)
  • डॉ शंकर दयाल शर्मा
    (25 जुलाई 1992-25 जुलाई 1997)
  • के आर नारायणन
    (25 जुलाई 1997-25 जुलाई 2002)
  • डॉ एपीजे अब्दुल कलाम
    (25 जुलाई 2002-25 जुलाई 2007)
  • प्रतिभा पाटिल
    (25 जुलाई 2007-25 जुलाई 2012)
  • प्रणब मुखर्जी
    (25 जुलाई 2012-25 जुलाई 2017)
  • रामनाथ कोविंद
    (25 जुलाई 2017-24 जुलाई 2022)
  • द्रोपदी मुर्मू
    (25 जुलाई 2022-वर्तमान)

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। वह उस सविधान सभा के अध्यक्ष थे जिसने संविधान की रुपरेखा तैयार की थी। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से भी एक थे। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति थे। उन्हें इस पद पर दो बार बने रहने का मौका मिला था। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद 26 जनवरी 1950 को पहली बार सवैधानिक रूप से राष्ट्रपति बने, इसी दिन इन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई। 1952 में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को पहली चुनी हुई संसद ने विधिवत पहला राष्ट्रपति बनाया। 13 मई 1952 को उन्होंने इस पद की एवं गोपनीयता की शपथ ली।

Dr. Rajendra Prasad first president of India

दूसरी बार 1957 को उन्होंने इस पद को सुशोभित करने का इतिहास रचा। 1962 में भी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जीतने वाले थे, लेकिन उन्होंने पद त्याग कर दिया। इस प्रकार अब तक दो बार राष्ट्रपति पद पर रहने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। साल 1962 में राष्ट्रपति पद से हट जाने के बाद राजेंद्र प्रसाद को भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के संवैधानिक राष्ट्रपति तो 26 जनवरी 1950 को बने थे, लेकिन इससे पूर्व वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के भी राष्ट्रपति बन कर आजादी की लड़ाई के दौरान मुंबई में संपन्न कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता कर चुके थे।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कई शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षण का कार्य किया था। इकोनॉमिक्स में एम.ए. की डिग्री हासिल करने के बाद वे बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित लंगट सिंह कॉलेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर नियुक्त किए गए। बाद में वे लॉ की पढ़ाई करने के लिए कोलकाता गए, जहां कोलकाता सिटी कॉलेज में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर बने।

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति

भारत के स्वतंत्र होने के पश्चात् प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के आग्रह पर उन्होंने 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य के रूप में काम किया। संसद में इनके सहकर्मियों के साथ-साथ विरोधी भी इनके सदाशयता, दृढ़ता और विनोदी स्वभाव के कारण लोग आज भी याद करते हैं। 

Dr Sarvpalli Radhakrishnan Second President of India

13 मई 1952 से 1962 तक डॉ राधाकृष्णन ने भारत के उपराष्ट्रपति के पद को सुशोभित किया। इसके पश्चात 13 मई 1962 को आज़ाद भारत के द्वितीय राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए। इनका कार्यकाल बेहद चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि इनके कार्यकाल के दौरान ही भारत और पाकिस्तान तथा भारत-चीन का युद्ध हुआ था।

डॉ जाकिर हुसैन (13 मई 1967-3 मई 1969)


देश के महान शिक्षाविद और तीसरे राष्ट्रपति डॉ.जाकिर हुसैन थे। उन्होंने अपना सारा जीवन शिक्षा को समर्पित कर दिया था और खुद को शिक्षक कहलाने में गर्व महसूस करते थे। देश की अहम यूनिवर्सिटियों में शामिल जामिया मिल्लिया इस्लामिया की बुनियाद भी उन्होंने ही रखी थी।
उन्होंने 22 वर्षो तक इस संस्था की सेवा की | देश की स्वतंत्रता के बाद जाकिर हुसैन अलीगढ़ विश्वविद्यालय के उपकुलपति बने |
भारत के राष्ट्रपति की सूची | List of India president | President of India list Zakir Husain

1952 में राज्य सभा में सदस्य चुने जाने पर उनका सक्रिय राजनीतिक जीवन आरम्भ हुआ। 
डा.जाकिर हुसैन  पहले बिहार के राज्यपाल बने और यूनेस्को में भारत का प्रतिनिधत्व किया | 1962 में उनका निर्वाचन देश के राष्ट्रपति पद के लिए हुआ और 13 मई 1967 को डा.जाकिर हुसैन इस पद पर प्रतिष्टित हुए |

उनके राष्ट्रपति बनने से भारत के पन्थनिरपेक्ष स्वरूप को ओर भी सम्मान मिला | अनेक देशो की यात्राये करके अपने देश का समतामुलक स्वरूप विश्व के सामने स्पष्ट किया | पद पर रहते हुए 3 मई 1969 को दिल के दौरे से उनकी मौत हो गई।

वीवी गिरी (मई 1969-20 जुलाई 1969 एवं 24 अगस्त 1969-24 अगस्त 1974)

'वी.वी. गिरी' का पूरा नाम वराहगिरी वेंकटगिरी है। उनका जन्म 10 अगस्त, 1894 को बेहरामपुर, ओड़िशा में हुआ था। उनके पिता वी.वी. जोगिआह पंतुलु, बेहरामपुर के एक लोकप्रिय वकील और स्थानीय बार काउंसिल के नेता भी थे।

भारत के राष्ट्रपति की सूची | List of India president | President of India list Forth Indian President V V Giri

सन 1954 तक वी.वी. गिरी श्रम मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं देते रहे। वे उत्तर प्रदेश, केरल, मैसूर में राज्यपाल भी नियुक्त किए गए। वी.वी. गिरी सन 1967 में ज़ाकिर हुसैन के काल में भारत के उप राष्ट्रपति एवं जब ज़ाकिर हुसैन के निधन के समय भारत के राष्ट्रपति का पद खाली रह गया था, तो उनको कार्यवाहक राष्ट्रपति का स्थान दिया गया। वी वी गिरी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा। भारतीय इतिहास में पहली बार वी वी गिरी कांग्रेस उमीदवार को हरा कर राष्ट्रपति चुनाव जीते। सन 1969 में वी.वी. गिरी देश के चौथे राष्ट्रपति बनाए गए।

85 वर्ष की आयु में वी.वी. गिरी का 23 जून, 1980 को मद्रास में निधन हो गया। उनको श्रमिकों के उत्थान और देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया। वी.वी गिरी एक अच्छे वक्ता होने के साथ-साथ एक कुशल राजनीतिज्ञ भी थे। उनमें लेखन क्षमता भी बहुत अधिक और उच्च कोटि की थी। देश के लिए उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें सदैव याद किया जायेगा। 

डॉ फ़ख़रुद्दीन अली अहमद (24 अगस्त 1974-11 फरवरी 1977)

'फखरुद्दीन अली अहमद' का जन्म 13 मई, 1905 को पुरानी दिल्ली के हौज काजी इलाके में हुआ था। इनके पिता का नाम कर्नल जलनूर अली अहमद था। फखरुद्दीन अली अहमद का जन्म एक नामी मुस्लिम घराने में हुआ था।
फखरुद्दीन अली अहमद खेलकूद के प्रति बचपन से ही काफी रुझान था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उत्तर-प्रदेश के गोंडा जिले के सरकारी हाई स्कूल में हुई थी। इसके पश्चात उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय एवं दिल्ली के प्रसिद्ध स्टीफन कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की। फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने स्नातक स्तर की शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात विधि की शिक्षा संपन्न कर ली।

भारत के राष्ट्रपति की सूची | List of India president | President of India list Fakharuddin ali ahmed fifth president of india

फखरुद्दीन अली अहमद ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया। सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए अंग्रेजी सरकार ने उनको जेल भी भेजा। 1957 में उन्होंने यू.एन.ओ में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व किया। उन्होंने सिंचाई एवं ऊर्जा मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया। इन्होंने शिक्षा मंत्री के रूप में भी कार्य किया। इन्होंने कृषि मंत्री के रूप में भी कार्य किया। 25 अगस्त, 1974 को फखरुद्दीन अली अहमद को राष्ट्रपति पद प्राप्त हुआ। इन्होने देश के पांचवे राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।

फखरुद्दीन अली अहमद का देहांत 11 फरवरी, 1977 को हुआ। वे एक अनुकरणीय व्यक्तित्व वाले इंसान थे। एक सच्चे राष्ट्रभक्त एवं धर्मनिरपेक्ष नीति के ज्वलंत उदाहरण के रूप में उन्हें सदैव याद किया जायेगा।  

नीलम संजीव रेड्डी (25 जुलाई 1977-25 जुलाई 1982)

नीलम संजीवा रेड्डी भारत के छठें राष्ट्रपति थे। वे एक राष्ट्रवादी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे। सामान्य स्वाभाव लेकिन पक्के राष्ट्रवादी थे। दूरदर्शी नेतृत्व, मिलनसारिता और सहज उपलब्धता ने उन्हें जीवन के सभी क्षेत्रों में लोगों का परम प्रिय बना दिया

नीलम संजीवा रेड्डी का जन्म 19 मई, 1913 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में एक मध्यम वर्गीय परिवार हुआ था। कृषक परिवार में जन्मे होने के बावजूद वे एक कुशल नेता थे। उनके पिता का नाम नीलम चिनप्पा रेड्डी था जो कॉग्रेस के पुराने कार्यकर्ता और प्रसिद्ध नेता टी. प्रकाशम के साथी थे। परिवार की भगवान शिव में गहरी आस्था थी। संजीवा रेड्डी भारत के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जिनको राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर पहली बार असफलता मिली थी। दूसरी बार उम्मीदवार बनाए जाने पर राष्ट्रपति पद के लिए इनका चुनाव हुआ था।

1951 में ए.पी.सी.सी. के अध्यक्ष बने। 1952 में वे आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने। अक्टूबर 1956 को आंध्र प्रदेश राज्य का गठन हुआ और मुख्यमंत्री का कार्यभार रेड्डी को सौंपा गया। 1959 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बन गए। दो बार कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का कार्य सँभालने के बाद वे वापस आंध्र प्रदेश लौट आए। 1964 में वे दोबारा फिर मुख्यमंत्री बने। किंतु किसी कारणवश अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

1964 में रेड्डी राष्ट्रीय राजनीति में आ गए। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें केन्द्र में स्टील एवं खान मंत्रालय का भार सौंपा। 1964-1977 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। 1967 में इंदिरा गांधी की सरकार में वे थोड़े समय के लिए परिवहन, विमानन, नौवहन और पर्यटन मंत्री भी रहे। 1971 में लोकसभा चुनाव हुए जिसमे उनको कांग्रेस का टिकट तो मिला पर वे हार गए। हार से निराश होकर रेड्डी अपने गाँव अनंतपुर आ गए और कृषि करने लगे। 1975 में वे वापस राजनीती में आए। 1977 में जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। अगले लोकसभा चुनाव में वे आंध्र प्रदेश की नंड्याल सीट से खड़े हुए और विजयी हुए। 26 मार्च 1977 में वे लोकसभा के स्पीकर नियुक्त हुए। 1977 में ही 13 जुलाई को उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रपति पद के लिए नियुक्त हुए। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण मुद्दों पर अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिये।

ज्ञानी जैल सिंह (25 जुलाई 1982-25 जुलाई 1987)

ज्ञानी जैल सिंह भारत के सातवें राष्ट्रपति थे। वे बेहद धार्मिक व्यक्तित्व वाले इंसान थे। वह केवल एक दृढ निश्चयी और साहसी व्यक्तित्व वाले इंसान ही नहीं बल्कि एक समर्पित सिख भी थे। भारतीय राजनीति में आज भी उन्हें एक निरपेक्ष और दृढ़ निश्चय वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है। 

ज्ञानी जैल सिंह का जन्म 5 मई, 1916 को पंजाब प्रांत के फरीदकोट जिले के संधवान ग्राम में हुआ। पिता किशन सिंह एक किसान व बढई थे। जैल सिंह के बचपन में ही उनकी माता चल बसी थी। उनका पालन पोषण मौसी के देखरेख में हुआ। उनका असल नाम जरनैल सिंह था। जैल सिंह को शुरू से ही पढाई से ज्यादा लगाव नहीं था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा भी पूरी नहीं की थी। लेकिन उर्दू भाषा सिखने की ललक उनमे हमेशा रही। अपनी इस इच्छा पूर्ती के लिए उन्होंने उर्दू का ज्ञान प्राप्त भी किया। फिर गाना-बजाना सीखने की धुन सवार हुई तो एक हारमोनियम बजाने वाले के यहाँ उसके कपड़े धोकर, उसका खाना बनाकर बजाना सीखने लगे। पिता की राय मिलने पर वे गुरुद्वारा में भजन कीर्तन करने लगे। कुछ समय पश्चात उन्होंने अमृतसर के शहीद सिख मिशनरी कॉलेज से गुरु ग्रंथ का पाठ सीखा जिससे वे गुरुग्रंथ साहब के ‘व्यावसायिक वाचक’ बन गए और उन्हें ज्ञानी की उपाधि से सम्मानित किया गया।

नीलम संजीवा रेड्डी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 25 जुलाई, 1982 को उन्हें सर्वमत से राष्ट्रपति पद से नवाज़ा गया। राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल प्रारंभ से अंत तक विवादों से घिरा रहा। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेशानुसार जब सिख अलगाववादियों को पकड़ने के उद्देश्य से अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार चलाया गया, तब जैल सिंह ही राष्ट्रपति थे। इंदिरा गांधी की हत्या और उसके विरोध में जब सिख समुदाय को मारा गया तब भी वही राष्ट्रपति थे। इसके बाद जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तब किसी विधेयक को पास करने को लेकर उनके और प्रधानमंत्री के संबंधों में खिंचाव के समाचार भी सुनने में आए। बावजूद उन्होंने अपना कार्यकाल कुशलता पूर्वक पूरा किया। 25 July,1987 तक वे इस पद पर बने रहे।

1994 में तख्त श्री केशगड़ साहिब जाते समय उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उनकी मृत्यु हो गई। दिल्ली में जहां ज्ञानी जैल सिंह का दाह-संस्कार हुआ था उसे एकता स्थल नाम दिया गया है। 

आर वेंकटरमण (25 जुलाई 1987-25 जुलाई 1992)

आर. वेंकटरमण भारतीय गणराज्य के आठवें राष्ट्रपति है। इससे पहले वह उपराष्ट्रपति भी रह चुके है। अपने कार्यों और उत्तरदायित्वों के प्रति बेहद संजीदा रहने वाले वेंकटरमण एक कुशल और परिपक्व राजनेता ही नहीं बल्कि बेहद सुलझे हुए और अच्छे इंसान भी थे। रामस्वामी वेंकटरमण का जन्म 4 दिसंबर, 1910 को तमिलनाडु में तंजौर के पास पट्टुकोट्टय में हुआ था। पिता का नाम रामास्वामी अय्यर था और वें तंजौर जिले में एक वकील थे। वेंकटरमण की प्राथमिक शिक्षा मद्रास में हुई। मद्रास विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कानून की परीक्षा के लिए उन्होंने मद्रास के डी लॉ कॉलेज में दाखिला लिया। 

रामस्वामी वेंकटरमण का जन्म 4 दिसंबर, 1910 को तमिलनाडु में तंजौर के पास पट्टुकोट्टय में हुआ था। पिता का नाम रामास्वामी अय्यर था और वें तंजौर जिले में एक वकील थे। वेंकटरमण की प्राथमिक शिक्षा मद्रास में हुई। मद्रास विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कानून की परीक्षा के लिए उन्होंने मद्रास के डी लॉ कॉलेज में दाखिला लिया। 

1957 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर वेंकटरमण सांसद के रूप में चुने गए। पद की लालसा न दिखाते हुए उन्होंने इस पद को त्याग दिया और मद्रास राज्य के मंत्रीपरिषद का पद ग्रहण किया। तब वहां के मुख्यमंत्री के. कामराज ने उनकी राजनैतिक प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1957 से 1967 तक वेंकटरमण ने मद्रास राज्य में सहकारिता, वाणिज्यिक कर, श्रम, उद्योग, यातायात और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण कार्यो को सफलतापूर्वक संभाला।

1967 में तमिलनाडु में सत्ता कांग्रेस के हाथों से चली गई। उसके बाद वेंकटरमण दिल्ली आ गए। उन्हें योजना आयोग का सदस्य चुन लिया गया। इस दौरान वे उद्योगों, समाज, यातायात, अर्थव्यस्था से जुड़े कार्य संभालते रहे। 1971 तक उन्होंने इस पद की गरिमा बढाई। 1980 में वे पुनः लोकसभा चुनाव जीते और सांसद बन गए। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने उन्हें वित्त मंत्री बना दिया। 1982 से 1984 तक रक्षा मंत्री का भार सौंपा गया। 22 अगस्त 1984 में उपराष्ट्रपति का कार्य संभाला। उसी दौरान राज्यसभा के अध्यक्ष भी रहे। 24 जुलाई 1987 को उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दे दिया। 25 जुलाई 1987 को आठवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।

98 वर्ष की आयु में 27 जनवरी, 2009 को एक लंबी बीमारी के चलते दिल्ली के आर्मी अस्पताल में उनका निधन हो गया।

डॉ शंकर दयाल शर्मा (25 जुलाई 1992-25 जुलाई 1997)

डॉ. शंकर दयाल शर्मा देश के 25 जुलाई 1992 – 25 जुलाई 1997 तक नवें राष्ट्रपति रहे। उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में जॉर्ज गिल्बर्ट स्वेल को पराजित किया था। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी को पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलवाई थी। बुद्धिमान और अति विनम्र डॉ.शंकर दयाल शर्मा 1971 में भोपाल सीट से लोकसभा के सदस्य बने और इस तरह उनका दिल्ली से संबंध बन गया। वे 1974 में केन्द्रीय संचार मंत्री बने।

शंकर दयाल शर्मा का जन्म 19 अगस्त, 1918 को मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में हुआ था। उनके पिता खुशीलाल शर्मा एवं माता शुभद्रा शर्मा थी। डॉ शंकर दयाल शर्मा ने अपनी शिक्षा देश एवं विदेश के विश्वविद्यालयों से पूरी की थी। उनकी शिक्षा की शुरुआत सेंट जॉन कॉलेज से हुई थी। इसके बाद उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय और इलाहबाद विश्वविद्यालय से भी शिक्षा ग्रहण की थी। एल. एल. एम. की पढाई के लिए वे लखनऊ विश्वविद्यालय गए। शिक्षा के प्रति लगन के चलते वें पी.एचडी करने फिट्ज़ विलियम कॉलेज, केम्ब्रिज विश्वविद्यालय चले गए। फिर लंदन विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेसन में डिप्लोमा किया। इतनी शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी यहाँ रुके नहीं बल्कि लखनऊ विश्वविद्यालय में 9 साल तक कानून के प्रोफ़ेसर रहे। फिर केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में भी उन्होंने बच्चों को कानून की शिक्षा दी। वे सिर्फ पढाई में ही आगे नहीं थे वरन खेलकूद में भी हमेशा आगे रहते थे। वे एक अच्छे धावक एवं तैराक थे। उन्होंने पत्रकारिता में भी अपना हाथ अजमाया था। उन्होंने कविता, इतिहास, कला व संस्कृति एवं साहित्य के बहुत से लेख लिखे है। अपनी पढाई एवं उसके बाद जब वे शिक्षक थे तब से ही उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अंग्रजो के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी थी।

उनके राजनैतिक सफ़र की शुरुआत 1940 में तब हुई जब स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। ये वो पार्टी थी जिसके अंदर रह कर उन्होंने बहुत सारी लड़ाईयां और चुनाव लड़े एवं जीत हासिल कर अच्छे पदों में रहे। वे अंत तक इस पार्टी के प्रति वफादार रहे। 1942 में महात्मा गाँधी द्वारा चलाए गए “भारत छोड़ो आन्दोलन” में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1950 से लेकर 1952 तक वे भोपाल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। तत्पश्चात 1952 में ही कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हुए वे भोपाल के मुख्यमंत्री बने एवं 1956 तक इस पद पर रहे। 1956 से लेकर 1971 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। इस दरम्यान कांग्रेस पार्टी के नेता के तौर पर उन्होंने इंदिरा गांधी का बहुत सहयोग किया। 1959 में प्राथमिक शिक्षा के लिए करांची में जब यूनेस्को की कांफ्रेंस हुई तब उन्होंने ही भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व किया था। 

1974 से लेकर 1977 तक वे इंदिरा गांधी सरकार में संचार मंत्री रहे। वे 1971 एवं 1980 में लोकसभा सीट के लिए खड़े हुए और दोनों ही बार सफलता प्राप्त हुई। इस तरह वे दिल्ली संसद पहुँच गए। 1984 में आंध्रप्रदेश, 1985 में पंजाब एवं 1986 में महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे। 1984 में जब वे आंध्रप्रदेश के राज्यपाल थे तब कुछ सिख समुदाय के लोगो ने दिल्ली में रह रहे उनके दामाद एवं बेटी की हत्या कर दी थी। 1987 में आर. वेंकटरमण के कार्यकाल में उनको उपराष्ट्रपति बनाया गया था। इसी दौरान वे राज्यसभा के अध्यक्ष भी रहे थे। 1992 में जब आर. वेंकटरमण का कार्यकाल समाप्त हुआ तब उन्हें राष्ट्रपति पद से नवाजा गया था।

26 दिसंबर,1999 को दिल का दौरा पड़ने के कारण देहांत हो गया। उनका दाह संस्कार दिल्ली में विजय घाट में हुआ था। 

के आर नारायणन (25 जुलाई 1997-25 जुलाई 2002)

'के.आर. नारायणन' का पूरा नाम कोच्चेरील रमन नारायणन था। उनका जन्म 27 अक्टूबर, 1920 को केरल के एक छोटे से गांव पेरुमथॉनम उझावूर, त्रावणकोर में हुआ था। इनके पिता का नाम कोच्चेरिल रामन वेद्यार था। यह भारतीय पद्धति के सिद्धहस्त आयुर्वेदाचार्य थे। के.आर. नारायणन का परिवार काफी गरीब था। लेकिन इनके पिता अपनी चिकित्सकीय प्रतिभा के कारण आस-पास के सभी ग्रामों में बेहद सम्माननीय माने जाते थे।
भारत के राष्ट्रपति की सूची | List of India president | President of India list Thenth president of india k r narayana
के.आर. नारायणन की आरंभिक शिक्षा उझावूर के अवर प्राथमिक विद्यालय में ही शुरू हुई। उन्होंने सेंट मेरी हाई स्कूल से 1936-37 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने कला (ऑनर्स) में स्नातक स्तर की परीक्षा पास की। फिर अंग्रेज़ी साहित्य में त्रावणकोर विश्वविद्यालय (वर्तमान का केरल विश्वविद्यालय) से 1943 में स्नातकोत्तर परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। 1945 में ही इंग्लैण्ड चले गए और ‘लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ में राजनीति विज्ञान का अध्ययन किया।

के.आर. नारायणन एक गंभीर व्यक्तित्व वाले इंसान थे। वह एक कुशल राजनेता होने के साथ-साथ एक अच्छे अर्थशास्त्री भी थे। उन्होंने बतौर पत्रकार कार्य किया। वह लगातार तीन लोकसभा चुनावों में ओट्टापलल (केरल) की सीट पर विजयी होकर लोकसभा पहुंचे। एक मंत्री के रूप में इन्होंने योजना, विदेश मामले तथा विज्ञान एवं तकनीकी विभागों का कार्यभार सम्भाला। श्री नारायणन 21 अगस्त, 1992 को डॉ. शंकर दयाल शर्मा के राष्ट्रपतित्व काल में उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। 17 जुलाई, 1997 को वे स्वतंत्र भारत के अब तक के दसवें और पहले दलित राष्ट्रपति बने।

9 नवम्बर, 2005 को आर्मी रिसर्च एण्ड रैफरल हॉस्पिटल, नई दिल्ली में श्री नारायणन का निधन हो गया। के.आर. नारायणन एक अच्छे राजनेता और राष्ट्रपति के साथ-साथ एक अच्छे इंसान भी थे। राष्ट्र प्रेम, विशिष्ट नैतिक मनोबल तथा साहस के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम (25 जुलाई 2002-25 जुलाई 2007)

डॉक्टर ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुल अब्दीन अब्दुल कलाम था। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के धनुषकोडीगाँव में मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके जन्मदिवस पर प्रत्येक वर्ष विश्व छात्र दिवस आयोजित किया जाता है।
भारत के राष्ट्रपति की सूची | List of India president | President of India list
डॉक्टर कलाम के अंदर कुछ ना कुछ नया सीखने की भूख थी उन्होंने अपने स्कूल की पढ़ाई पास के ही एक साधारण से स्कूल से पूरी की और उसके बाद तिरुचिल्ला पल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज में दाखिला लिया और 1954 में भौतिक विज्ञान में स्नातक की उपाधि ली। 

वह वर्ष 1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से जुड़ गए और वहाँ पर वह भारत के सेटेलाइट परियोजना के परियोजना निदेशक के रूप में कार्यरत हुए। कलाम जी के निर्देशन में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान slv-3 के निर्माण में सफल हुए और यहीं से नीव पड़ी। उनके मिसाइल मैन बनने की। फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उन्होंने 10 वर्ष में कई मिसाइल है- अग्नि, त्रिशूल, पृथ्वी, आकाश व ब्रह्मोस भारत को दी। उन्होंने उन सभी को जवाब दिया जो सोचते थे कि भारत कुछ नहीं कर सकता। उनके वैज्ञानिक कार्य को देखते हुए 1992 में उन्हें भारतीय रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया।

एक अद्भुत वैज्ञानिक के तौर पर उनकी उपलब्धियों को देखते हुए 2002 में उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया। यह भारत के 11वे  राष्ट्रपति थे। जिन्होंने 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक राष्ट्रपति पद को संभाला था। राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए भी वह देश के लोगों की भलाई के रास्ते ढूंढते रहे।

27 जुलाई 2015 को अध्यापन कार्य के दौरान शिलोंग में उनकी दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गयी और वह अपनी दांस्ता कहते-कहते चिर निद्रा में सो गए, जिसमे पलके फिर कभी नहीं खुलती है। इस प्रकार भारत ने एक महान व्यक्तित्व वाले महापुरुष को हमेशा के लिए खो दिया।

प्रतिभा पाटिल (25 जुलाई 2007-25 जुलाई 2012)

'प्रतिभा देवी सिंह पाटिल' का जन्म 19 दिसंबर, 1934 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले में हुआ था। इनके पिता का नाम नारायण राव था। सन 1965 में इनका विवाह शिक्षाविद देवीसिंह रणसिंह शेखावत के साथ संपन्न हुआ।

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने 27 वर्ष की आयु में अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की। उन्होंने स्वतंत्र भारत के इतिहास में 12वीं राष्ट्रपति और पहली महिला राष्ट्रपति बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। वे जुलाई 2007 से जुलाई 2012 तक देश की राष्ट्रपति रहीं। वे एक बेहद सम्माननीय महिला के तौर पर देखी जाती हैं। केवल इसलिए नहीं कि वह भारत की राष्ट्रपति रही हैं, बल्कि इसलिए कि देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने एक महिला होने के नाते अपनी गरिमा को बनाए रखा है। उनका व्यक्तित्व स्वयं ही एक शांत और निर्मल स्वभाव की महिला की पहचान है।

बाल्‍यकाल से लेकर राष्‍ट्रपति भवन तक प्रतिभा पाटिल की यात्रा निश्चित रूप से एक प्रेरक प्रसंग है और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक आशा की किरण। भारतीय राजनीति के इतिहास में यह ऐतिहासिक घटना सचमुच उल्लेखनीय रहेगी।  

प्रणब मुखर्जी (25 जुलाई 2012-25 जुलाई 2017)

श्री मुखर्जी का जन्म मिरती पश्चिम बंगाल में 11 दिसम्बर 1935 में हुआ। उनके पिता का नाम कमादा किंकर मुखर्जी और माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी था। उनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके पिता एक कांग्रेसी थे। वे कई बार जेल जा चुके थे। उन्होंने इतिहास, राजनीती विज्ञान, वकालत की मास्टर डिग्री कोलकाता विश्विद्यालय से ली थी।

उन्होंने अपना करिअर कॉलेज के प्राध्यापक के रूप में शुरू किया। बादमे पत्रकारिता भी की। अपने सहकर्मियों से प्रभावित होकर वे राजनीती में आए। 1969 में राज्य सभा के लिए संसद चुने गए। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के नेतृत्व में अपना राजनितिक पद जल्दी ही उन्होंने विस्तारित करवा लिया।
भारत के राष्ट्रपति की सूची | List of India president | President of India list Pranab Mukherjee 13th president of India

1973 से 1974 के बिच में उन्होंने, उप मंत्री, उद्योग मंत्री, वाहन और नववाहन मंत्री, इस्पात उद्योग मंत्री का कार्य किया। 1982 में पहली बार वित्त मंत्री बने। 1980 से 1985 के बिच में राज्य सभा में रहे। 1991 से 1996 के बिच में विदेशी मंत्री रहे। 1993 से 1995 के बिच वाणिज्य विभाग में काम किया।

2004 से 2006 के बिच में रक्षा मंत्री रहे। 2006 से 2009 में वे पुन्ह विदेश मंत्री बने। 2009 से 2012 में वे फिर वित्त मंत्री बने। और 2004 से 2012 में लोक सभा के सदस्य रहे। श्री मुखर्जी आइमफ वर्ल्ड बैंक के, एशियन डेवलपमेंट बैंक के और अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर बने।

उन्हें अपने जीवन में कई पुरस्कार भी मिले। पद्मभूषण 2008 में, बेस्ट पार्लियामेंट्रीयन अवार्ड 1997 में, बेस्ट पर्सन ऑफ़ इंडिया अवार्ड मिला। 

31 अगस्त 2020 को काफी लंबी बीमारी के बाद उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। उनकी मौत का कारण लंग्स इंफेक्शन बताया जा रहा है, उन्हें जीवन के अंतिम पलों मे  वेंटिलेटर सर्पोट पर भी रखा गया था।

डॉक्टरों की मानें तो ब्रेन सर्जरी के बाद से ही वे कोमा में थे। कई दिनों तक उनका इलाज दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में भी चला। लेकिन इस दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और 84 साल की उम्र में उन्होंने दम तोड़ दिया।

प्रणब मुखर्जी देश के 13वें राष्ट्रपति हैं जिन्होंने जुलाई 2012 से पद संभाला है। इससे पहले वे छह दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्हें कांग्रेस का संकटमोचक माना जाता है। 80 वर्षीय मुखर्जी विदेशी मंत्री, रक्षा मंत्री, वाणिज्य मंत्री और वित्त मंत्री के रूप में अलग-अलग समय पर सेवा की वे दुर्लभ विशिष्टा के साथ शासन में अद्वितीय अनुभव वाले इंसान है।

रामनाथ कोविंद (25 जुलाई 2017-24 जुलाई 2022)

राम नाथ कोविंद एक भारतीय राजनेता हैं जो भारत के 14 वें और वर्तमान राष्ट्रपति के रूप में कार्यरत हैं। अपने नामांकन से पहले, उन्होंने 2015 से 2017 तक बिहार के 26वें राज्यपाल और 1994 से 2006 तक राज्यसभा के सदस्य के रूप में कार्य किया।

भारत के राष्ट्रपति की सूची | List of India president Ram Nath Kovind | President of India list

राम नाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के परौंख गाँव में मौइकू लाल और कलावती के यहाँ हुआ था। वह पांच भाई और दो बहनों में सबसे छोटा था। 

उनके पिता एक “परौख गांव के चौधरी”, एक “वैद्य” (आयुर्वेद के व्यवसायी) थे, जो किराना और परिधान की दुकानों के मालिक थे। जबकि उनकी माँ एक गृहिणी थीं। 

वह एक मेधावी छात्र थे जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा कानपुर देहात के खानपुर शहर से की। बाद में, वह कानपुर विश्वविद्यालय से वाणिज्य और कानून की पढ़ाई करने के लिए कानपुर शहर चले गए। 

स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद, उन्होंने दिल्ली में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी, जहां उनकी मुलाकात ‘जनसंघ’ के नेता हुकुम चंद (उज्जैन से) से हुई, जिसके बाद उनकी राजनीति में रुचि पैदा हुई।

कोविंद को सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन द्वारा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया था और 2017 का राष्ट्रपति चुनाव जीता था। 

राजनीति में आने से पहले, वह 16 साल तक वकील रहे और 1993 तक दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत की

द्रोपदी मुर्मू (25 जुलाई 2022-वर्तमान)

द्रौपदी मुर्मू ने देश के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले ली है। सोमवार 25 जुलाई को संसद भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एन वी रमन्ना ने उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज संसद भवन के सेंट्रल हॉल में देश सर्वोच्च संवैधानिक पद की शपथ ग्रहण ली। इसके बाद उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई। राष्ट्रपति शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। शपथ लेने के बाद अपने संबोधन में महामहीन ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।
India president draupadi murmu | President of India list

इनका जन्म 20 जून 1958 को भारत की आजादी के बाद हुआ था। यह भारतीय जनता पार्टी की सदस्य हैं, जिन्होंने साल 2015 से लेकर 2021 तक झारखंड की राज्यपाल थी। इसके अलावा द्रोपदी मुर्मू ने पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री के तौर पर भी काम किया है। राष्ट्रपति पद के लिए द्रोपदी मुर्मू ने विपक्ष के नेता यशवंत सिन्हा को हराया और भारत के नए राष्ट्रपति घोषित हुई। द्रोपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद के लिए 25 जुलाई 2022 को शपथ लेंगी।

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को उड़ीसा के मयूरभंज जिले में एक आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडू था। जो अपने गांव और समाज के मुखिया थे।

अगर बात करें द्रोपदी मुर्मू के शिक्षा की तो उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद भुवनेश्वर के रामादेवी महिला विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की और पढ़ाई पूरी करने के बाद द्रौपदी मुर्मू ने एक शिक्षक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की, हालांकि उन्होंने इस क्षेत्र में कुछ समय तक ही काम किया और बाद में राजनीतिक में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया।

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