Stephen Hawking Biography in Hindi | स्टीफन विलियम हॉकिंग जीवनी

Stephen Hawking Biography in Hindi स्टीफन विलियम हॉकिंग एक विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी, ब्रह्माण्ड विज्ञानी, लेखक और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक ब्रह्मांड विज्ञान केंद्र (Centre For Theoretical Cosmology) के शोध निर्देशक थे। स्टीफन हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग थ्योरी की समझाने में अहम योगदान दिया है। उनके विकिरण (रेडिएशन) को हॉकिंग रेडिएशन भी कहा जाता है। हॉकिंग ऐसे पहले व्यक्ति थी जिन्होंने ब्रह्माण्ड को समझने की थ्योरी विकसित की थी। वैश्विक स्तर पर उन्होंने बहुत से अभियानों में अपना सहयोग भी दिया है। वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर थे और अपनी थ्योरी के चलते जल्द ही उन्हें कमर्शियल सफलता भी मिली। उनके द्वारा लिखित किताब ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम उस समय की सबसे ज्यादा समय तक बिकने वाली किताब बनी। उस समय वह किताब लगभग रिकॉर्ड 237 हफ्तों तक चली। 

"मैं अभी और जीना चाहता हूँ” ये कथन किसी और के नहीं बल्कि विश्व के महान वैज्ञानिको में से एक स्टीफन हॉकिंग के थे। जो उन्होंने अपने पिछले जन्मदिन पर कहे थे। जिसे सुन दुनिया एक पल के लिये अचंभित सी रह गयी थी। आज उन्हें भौतिकी के छोटे-बड़े कुल 12 पुरस्कारों से नवाजा जा चूका है। 

Stephen Hawking Biography in Hindi | स्टीफन विलियम हॉकिंग जीवनी

स्टीफन हॉकिंग का जन्म एवं जन्म स्थान

स्टीफन हॉकिंस का पूरा नाम स्टीफन विलियम हॉकिंस था। स्टीफन विलियम हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी, 1942 को इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में हुआ था। आपको याद हो तो यह वही दिन था जिस दिन महँ खगोल वैज्ञानिक (Astronomer) गैलीलियो का भी जन्म हुआ था। गैलीलियो की मृत्यु के ठीक 300 साल बाद हॉकिंग का जन्म हुआ था।

माता-पिता और परिवार

स्टीफन हॉकिंस के पिता का नाम फ्रैंक तथा माता का नाम इसाबेल एलेन हॉकिंग था। परिवार वित्तीय बाधाओं के बावजूद, माता पिता दोनों की शिक्षा ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय में हुई जहाँ फ्रेंक ने आयुर्विज्ञान की शिक्षा प्राप्त की और इसाबेल ने दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया। वो दोनों द्वितीय विश्व युद्ध के आरम्भ होने के तुरन्त बाद एक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में मिले जहाँ इसाबेल सचिव के रूप में कार्यरत थी और फ्रेंक चिकित्सा अनुसंधानकर्ता के रूप में कार्यरत थे। संयुक्त परिवार में भरोसा रखने वाले हॉकिंगमरते समय तक अपने तीन बच्चों और एक पोते के साथ रहते थे।

हॉकिंग की दो छोटी बहनें, फिलीपा और मैरी और एक गोद लिया भाई एडवर्ड फ्रैंक डेविड था।

प्रारम्भिक जीवन

स्टीफन हॉकिंस का पूरा नाम स्टीफन विलियम हॉकिंस था। उनके माता-पिता का घर उत्तरी लंदन में था। लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान लंदन की अपेक्षा ऑक्सफोर्ड अधिक सुरक्षित था, जिसके कारण हॉकिंग का परिवार ऑक्सफोर्ड में बस गया। जब वे आठ साल के थे तो वे उत्तरी लंदन से बीस मील दूर सेंट अलबेंस में बस गए। आठ वर्ष की आयु में वे रेडियो तथा अन्य कलपुर्जों को खोलकर जोड़ते रहते जिससे उनके अंदर वस्तुओं को जानने की जिज्ञासा ने जन्म लिया।

हॉकिंस के पिता एक चिकित्सक थे और अपने बच्चे आखिरी उसको भी एक चिकित्सक बनता हुआ देखना चाहते थे, किंतु स्टीफन हॉकिंस बचपन से ही गणित के प्रति अत्यंत रुचिकर थे उनकी विलक्षण प्रतिभा के कारण सभी व्यक्ति और उनके परिवार जान हमें नहीं आए स्टीम अथवा आइंस्टीन कहने लगे। 

11 साल की उम्र तक उन्होंने सेंट एलबेंस स्कूल में पढ़ाई की। फिर वे ऑक्सफोर्ड के यूनिवर्सिटी कॉलेज चले गए। स्टीफ़न हॉकिंग ने यूनिवर्सिटी कॉलेज, ऑक्सफ़ोर्ड में अपनी विश्वविद्यालय की शिक्षा 1959 में 17 वर्ष की आयु में शुरू की।

उनकी रुचि बचपन से गणित में थी, लेकिन पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे। चूंकि उनके पिता खुद एक डॉक्टर थे और इसीलिए वे ऐसा चाहते थे। पर संयोगवश उनकी आगे की पढ़ाई भौतिकी विषय में हुई क्योंकि उन दिनों कॉलेज में गणित की पढ़ाई उपलब्ध नहीं थी और धीरे-धीरे इसी विषय से कॉस्मोलॉजी सेक्शन में पढ़ाई की।

विवाह

हॉकिंग ने दो बार शादी की। पहली पत्‍नी जेन विल्‍ड थीं, जिनसे ग्रेजुएशन के दौरान 14 जुलाई 1965 ही हॉकिंग ने शादी की थी। ये 30 साल तक साथ रहे। इस दंपति के तीन बच्चे थे: रॉबर्ट, जन्म मई 1967, लुसी, जन्म नवंबर 1970, और टिमोथी, जिनका जन्म अप्रैल 1979 था। 1995 में इनका तलाक हो गया।

1995 में जेन से तलाक के बाद, हॉकिंग ने सितंबर में मेसन से शादी की। दूसरी शादी के बाद, हॉकिंग के परिवार ने अपने जीवन से बहिष्कृत और हाशिए पर महसूस किया।

2006 में, हॉकिंग और मेसन ने चुपचाप तलाक दे दिया और हॉकिंग ने जेन, उनके बच्चों और उनके पोते-पोतियों के साथ घनिष्ठ संबंध फिर से शुरू कर दिए।

स्टीफन हॉकिंस की प्रारंभिक शिक्षा

हॉकिंग ने अपनी स्कूली शिक्षा हाईगेट, लंदन के बायरन हाउस स्कूल से शुरू की। इसके बाद स्टीफन हॉकिंस सेंट एल्बंस हाई स्कूल फॉर गर्ल्स में पढ़ाई की। हॉकिंग के पिता चाहते थे कि उनका बेटा सुप्रसिद्ध वेस्टमिंस्टर स्कूल में पढ़े, लेकिन 13 वर्षीय हॉकिंग बीमार हो जाने के कारण छात्रवृत्ति न मिल सकी जिससे उनका परिवार छात्रवृत्ति के बिना स्कूल की फीस का खर्च वहन नहीं कर सकता था, इसलिए हॉकिंग सेंट एल्बंस में ही रहे। इसका एक अच्छा परिणाम यह था कि हॉकिंग उन दोस्तों के समूह के करीब रहे और ईसाई धर्म और एक्स्ट्रासेंसरी धारणा के बारे में लंबी चर्चा की। सन 1958 से, गणित के शिक्षक डिक्रान ताहटा की मदद से, उन्होंने घड़ी के पुर्जों, एक पुराने टेलीफोन स्विचबोर्ड और अन्य पुनर्नवीनीकरण घटकों से एक कंप्यूटर का निर्माण किया।

स्कूल के दिनों में उन्हें "आइंस्टीन" के रूप में जाना जाता था। उनके पिता उन्हें चिकित्सा का अध्ययन करवाना चाहते थे क्योंकि उस समय तक गणित में नौकरियाँ इतनी नहीं थी। अपने प्रधानाध्यापक की अगले वर्ष तक प्रतीक्षा करने की सलाह के बावजूद, हॉकिंग को मार्च 1959 में परीक्षा देने के बाद छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया।

बाद में उनको यूनिवर्सिटी कॉलेज से होते हुए ऑक्सफ़ोर्ड में पहुंचे कहां गए गणित विषय के अभाव में उन्हें भौतकी लेकर पढ़ाई करनी पड़ी थी।

कैम्ब्रिज में शोध के दौरान उनकी मुलाकात जयन्त नार्लीकर नामक एक वैज्ञानिक से हुई उन्होंने स्टीफन हॉकिंस की गणित की रुचि को देखते हुए कहा कि तुम कॉस्मोलॉजी क्यों नहीं चुन लेते स्टीफन हॉकिंग्स ने इस बात को समझा और उसे सहर्ष स्वीकार भी कर लिया।

यूनिवर्सिटी में छुट्टी मनाने जा रहे जब स्टीफन हॉकिंस 21 वर्ष की आयु में घर पहुंचे तो उन्हें एक असाध्य बीमारी जिसका नाम था मोटर न्यूरॉन ने ग्रसित कर लिया। इस बीमारी में व्यक्ति के हाथ पैर एवं पूरे शरीर में ऐठन पड़ने लगती है और व्यक्ति की अंत में गला अवरुद्ध हो जाने से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

भौतिकी विषय में प्रथम श्रेणी में डिग्री हासिल करने बाद इन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी आगे की पढ़ाई की. साल 1962 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड मैथेमैटिक्स एंड थ्योरिटिकल फिजिकल (डीएएमटीपी) में इन्होंने ब्रह्माण्ड विज्ञान पर अनुसंधान किया. अपना बाया हिस्सा लगभग खो चुके थे क्योंकि स्टीफन हॉकिंग उसके शरीर का लगभग आधे से ज्यादा हिस्सा निष्क्रिय हो चला था समय बीतता जा रहा था हॉकिंस का दाया भाग भी निष्क्रिय होने लगा

इन भयानक मुसीबतों को तय करने के पश्चात स्टीफन हॉकिंग्स वैज्ञानिक के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहे और पूरे विश्व में प्रसिद्ध रहे कुछ समय पश्चात बीमारियों का दर्द चलते रहे और वह व्हील चेयर का सहारा लेते रहे फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी वह समाज और विज्ञान की सेवा में लगातार जुटे रहे वर्ष 1979 से 2009 तक स्टीफन हॉकिंग्स कॉलेज के प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवा करते रहे और कैंब्रिज विश्वविद्यालय व्यावहारिक गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के प्रमुख थे।

स्टीफन हॉकिंग का करियर

कैम्ब्रिज से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भी हॉकिंग इस कॉलेज से जुड़े रहे और इन्होंने एक शोधकर्ता के रूप में यहां कार्य किया. इन्होंने साल 1972 में डीएएमटीपी में बतौर एक सहायक शोधकर्ता अपनी सेवाएं दी और इसी दौरान इन्होंने अपनी पहली अकादमिक पुस्तक, ‘द लाज स्केल स्ट्रक्चर ऑफ स्पेस-टाइम’ लिखी थी. यहां पर कुछ समय तक कार्य करने के बाद साल 1974 में इन्हें रॉयल सोसायटी (फैलोशिप) में शामिल किया गया. जिसके बाद इन्होंने साल 1975 में डीएएमटीपी में बतौर गुरुत्वाकर्षण भौतिकी रीडर के तौर पर भी कार्य किया और साल 1977 में गुरुत्वाकर्षण भौतिकी के प्रोफेसर के रूप में भी यहां पर अपनी सेवाएं दी. वहीं इनके कार्य को देखते हुए साल 1979 में इन्हें कैम्ब्रिज में गणित के लुकासियन प्रोफेसर (Lucasian Professor) नियुक्त किया गया था, जो कि दुनिया में सबसे प्रसिद्ध अकादमी पद है और इस पद पर इन्होंने साल 2006 तक कार्य किया.

स्टीफन हॉकिंग की बीमारी

हॉकिंग के जज्बे को उनके चिकित्सकों से लेकर पूरी दुनिया सिर झुकाती है। हॉकिंग का शरीर भले ही उनका साथ नहीं दे पाता है लेकिन अपने दिमाग के कारण उनकी तुलना आइंस्टाइन के समतुल्य की जाती है। हॉकिंग का आईक्यू (Intelligence Quotient ) 160 है। जो कि आईक्यू का उच्चतम स्तर है।

वे एक न ठीक होने वाली बीमारी यानी स्टीफ मोटर न्यूरॉन डिजीज नाम की एक ऐसी बीमारी से पीडित हैं। जिसमें मरीज़ धीरे-धीरे शरीर के किसी भी अंग पर अपना नियंत्रण खो देता है और इंसान सामान्य ढंग से बोल या चल नहीं सकता है। इस बीमारी में पूरा शरीर पैरालाइज्ड हो जाता है। व्यक्ति सिर्फ अपनी आंखों के जरिए ही इशारों में बात कर पाता है।

दरअसल, चिकित्सकों को जब इस बीमारी का पता चला, तो उन्होंने यहां तक कह डाला था कि अब स्टीफन हॉकिंग ज़्यादा दिनों तक नहीं जिंदा रह सकेंगे। लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी बीमारी को कमज़ोरी नहीं बनने दिया। साल 1963 में जब हॉकिंग 21 साल के थे तो उन्हें एम्योट्रोफिक लेटरल स्कलोरेसिस (Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS)) नाम बीमारी की वजह से लकवा मार गया था। हॉकिंग को जब यह पता चला कि वे मोटर न्यूरॉन डिजीज से पीडि़त हैं, तो उन्हें दु:ख ज़रूर हुआ, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। दरअसल, उन्हें यह नहीं समझ में आ रहा था कि वे शेष जीवन को कैसे और किस मकसद के साथ जीएं। ऐसे में उन्हें एक ही बात सूझी और वह कि चाहे कितनी भी बुरी परिस्थिति आए, उसे पूरी जिंदादिली के साथ जीओ। यही कारण है कि उन्होंने न केवल जेने वाइल्ड नामक अपनी प्रेमिका से शादी की, बल्कि अपनी पढ़ाई को भी आगे जारी रखा। हालांकि, यह सब करना आसानी से संभव नहीं था। क्योंकि उनके अंगों ने उनका साथ छोड़ दिया था और धीरे-धीरे उनकी जुबान भी बंद हो गई। अब वे न चल-फिर सकते थे और न ही अपनी बात को बोलकर किसी से शेयर ही कर सकते थे। अंतत: वह समय भी आया, जब डॉक्टरों ने व्हील-चेयर के सहारे शेष जीवन गुजारने की सलाह दे दी। इस बीमारी से पीड़ित लोग आमतौर पर 2 से 5 साल तक ही जिंदा रह पाते हैं, लेकिन वह दशकों जिए।

स्टीफन हॉकिंग के दिमाग को छोड़कर उनके शरीर का कोई भी अंग काम नहीं करता था। इसके बावजूद साइंस की दुनिया में हॉकिंग अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे।

स्टीफन हॉकिंग और व्हील-चेयर

हालांकि यह कोई सामान्य व्हीलचेयर नहीं है, बल्कि इसमें वे सारे इक्विपमेंट्स लगे हुए हैं, जिनके माध्यम से वे विज्ञान के अनसुलझे रहस्यों के बारे में दुनिया को बता सकते हैं। उनकी व्हील चेयर के साथ एक विशेष कम्प्यूटर और स्पीच सिंथेसाइजर लगा हुआ है। जिसके सहारे वे पूरी दुनिया से बात करते हैं। हॉकिंग का सिस्टम इंफ्रारेड ब्लिंक स्विच से जुड़ा हुआ है। जो उनके चश्मे में लगाया गया है। इसी के माध्यम से वे बोलते हैं। इसके अलावा उनके घर और ऑफिस के गेट रेडियो ट्रांसमिशन से जुड़ा हुआ है। हॉकिंग का जज़्बा ऎसा है कि वे पिछले कई दशकों से अपनी व्हील चेयर पर बैठे-बैठे अंतरिक्ष विज्ञान की जटिल पहेलियों और रहस्यों को सुलझा रहे हैं। इसमें वे काफ़ी हद तक सफल भी रहे। ब्लैक होल को लेकर हॉकिंग की थ्योरी बड़ी मजेदार है। इसमें हॉकिंग ने कहा है कि ब्रह्मांड में ब्लैक होल का अस्तित्व तो है लेकिन वे हमेशा काले नहीं होते। इसका मतलब यह है कि ब्लैक होल में अनिवार्य रूप से गुम हो जाने वाली ऊर्जा और समस्त द्रव्यमान उनसे नई ऊर्जा के रूप में प्रस्फुटित होते रहते हैं। विख्यात भौतिकविद आइंसटाइन की एक टिप्पणी पर वे कमेंट करते हुए कहते हैं कि ईश्वर न सिर्फ बखूबी जुआ खेलता है बल्कि उसके फेंके गए पासे ऐसी जगह गिरते हैं जहां वे हमें दिखते नहीं हैं। हॉकिंग दुनिया के लिए कितने महत्त्वपूर्ण हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे जब भी कुछ बोलते या लिखते हैं तो दुनिया भर की मीडिया की नजर में छा जाते हैं।

स्टीफन हॉकिंग द्वारा किए गए कार्य

स्टीफ़न हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझाने में अहम योगदान दिया है। उनके पास 12 मानद डिग्रियाँ हैं और अमरीका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया गया है।

प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाले बुनियादी लॉ पर कई शोध किए हैं. हॉकिंग ने अपने साथी रोजर पेनरोस के साथ मिलकर एक शोध किया था और दुनिया को बताया था अंतरिक्ष और समय, ब्रह्मांड के जन्म के साथ शुरू हुए हैं और ब्लैक होल के भीतर समाप्त होंगे.

आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी और क्वांटम थ्योरी का प्रयोग करके, हॉकिंग ने ये भी निर्धारित किया कि ब्लैक होल पूरी तरह से शांत नहीं हैं बल्कि उत्सर्जन विकिरण (emit radiation) करता है.

इसके अलावा हॉकिंग ने ये भी प्रस्ताव किया था कि ब्रह्मांड की कोई सीमा नहीं है और विज्ञान की मदद से ये भी पता किया जा सकता है कि ब्रह्माण्ड की शुरूआत कब हुई थी और कैसे हुई थी.

एक महान वैज्ञानिक

दरअसल, जिस क्षेत्र में योगदान के लिए स्टीफन हॉकिंग को याद किया जाता है, वह कॉस्मोलॉजी ही है। कॉस्मोलॉजी, जिसके अंतर्गत ब्रह्मांड की उत्पत्ति, संरचना और स्पेस-टाइम रिलेशनशिप के बारे में अध्ययन किया जाता है। और इसीलिए उन्हें कॉस्मोलॉजी का विशेषज्ञ माना जाता है, जिसकी बदौलत वे थ्योरी ऑफ 'बिग-बैंग' और 1974 में 'ब्लैक होल्स' की नई परिभाषा गढ़ पाने में कामयाब हो सके थे। उन्होंने अपनी रिसर्च से यह साबित किया कि ब्लैक होल से भी रेडिएशन तरंगें निकलती हैं। इससे पहले माना जाता था कि गुरुत्वाकर्षण के कारण ब्लैक होल से कुछ भी बाहर नहीं आता है। इसलिए इस सिद्धांत को हॉकिंग रेडिएशन थ्योरी के नाम से जाना जाता है। हॉकिंग ने ही ब्लैक होल्स की लीक एनर्जी के बारे में बताया।

प्रोफेसर हॉकिंग पहली बार थ्योरी ऑफ कॉस्मोलॉजी लेकर आए। इसे यूनियन ऑफ रिलेटिविटी और क्वांटम मैकेनिक्स भी कहा जाता है।

साल 1988 में स्टीफन की चर्चित पुस्तक 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम: फ्रॉम द बिग बैंग टु ब्लैक होल्स' आज भी दुनिया की सबसे अमूल्य पुस्तकों में से एक है। इस किताब में उन्होंने बिग बैंग सिद्धांत, ब्लैक होल, प्रकाश शंकु और ब्रह्मांड के विकास के बारे में नई खोजों का दावा कर दुनिया भर में तहलका मचा दिया था। इसके बाद कॉस्मोलॉजी पर आई उनकी पुस्तक की 1 करोड़ से ज्यादा प्रतियां बिकी थीं। इसे दुनिया भर में साइंस से जुड़ी सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक माना जाता है।

इसके इलावा हॉकिंग ने द ग्रैंड डिजाइन, यूनिवर्स इन नटशेल, माई ब्रीफ हिस्ट्री, द थ्योरी ऑफ एवरीथिंग जैसी कई प्रसिद्ध किताबें लिखीं।

उल्लेखनीय है कि उनके योगदानों के कारण उन्हें अब तक लगभग बारह सम्मानित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा, वे रॉयल सोसायटी और यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के एक सम्मानित सदस्य भी थे।

उन्‍होंने हॉकिंग रेडिएशन, पेनरोज-हॉकिंग थियोरम्‍स, बेकेस्‍टीन-हॉकिंग फॉर्मूला, हॉकिंग एनर्जी समेत कई अहम सिद्धांत दुनिया को दिए। उनके कार्य कई रिसर्च का बेस बने।

उनके पास अथाह ज्ञान का भण्डार था जिसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास 12 मानद डिग्रियां थीं।

ब्लैक होल और स्टेफन होकिंग

ब्लैक होल स्पेस में वो जगह है जहाँ भौतिक विज्ञान का कोई नियम काम नहीं करता. इसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बहुत शक्तिशाली होता है. इसके खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता. प्रकाश भी यहां प्रवेश करने के बाद बाहर नहीं निकल पाता है. यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है.

गैलक्सी बहुत बड़ी है इसका अंतिम सिरा कहा तक है इसका कोई अस्तित्व नहीं हैं, अतः गैलेक्सी (ब्रह्मण्ड) में बहुत से पिंड (तारे, गृह पत्थर आदि) बिखरे होते हैं। गैलेक्सी की सरचना लगभग परमाणुओं जैसी होती हैं। उनके बीच टक्कर होती हैं तो इस कारण गैलक्सी में पिण्डो के मध्य नाभिकीय सलयन (Nuclear Fusion) होता हैं, नाभिकीय संलयन से निकली हुई ऊर्जा के कारण ही तारा गुरुत्वाकर्षण से संतुलन में रहता हैं, इसलिए जब तारो में मौजूद हाइड्रोजन ख़त्म हो जाती हैं तो वह तारा धीरे-धीरे ठंडा होने लगता हैं। फिर अपने ईंधन को समाप्त कर चुके शौर्य द्रव्यमान से 1.5 गुना द्रव्यमान वाले तारे जो वे अपने ही खुद के गुरुत्वाकर्षण के विपरीत खुद को संभाल नहीं सकते हैं। इस तरह की स्थति में इस तारो या पिंडो के अंदर एक विस्फोट होता हैं, जिसे सुपरनोवा (supernova ) कहते हैं।

इस विस्फोट के पश्चात यदि उस पिंड का कोई घनत्व वाला अवशेष रहता है तो वह बहुत खतरनाक घनत्व युक्त न्यूट्रॉन तारा बन जाता हैं (Neutron Star) बन जाता हैं। ऐसे तारों में बहुत ज्यादा गुरुत्वीय खिचाव होने के वजह से पिंड में संकुचन (compress) होने लगता हैं। संकुचन होने के साथ-साथ आखिर में एक निश्चित क्रांतिक सीमा तक संकुचन हो जाता हैं तथा इस तरह के संकुचन के वजह से उस पिंड का आयतन या (volume) और समय भी विकृत (deform) हो जाता हैं और अपने में ही आयतन और टाइम का अतित्व मिट जाने के कारण वह अदृश्य हो जाता हैं तथा यह वही अदृश्य पिंड हैं जिनको हम ब्लैक होल कहते हैं। 

स्टीफन हॉकिंग को मिले पुरस्कार और उपलब्धियां 

प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग के पास कुल तेरह (13) मानद डिग्रियां हैं. वहीं उनके योगदान के लिए इन्हें कई अवार्ड भी दिए गए हैं और इन्हें अभी तक दिए गए पुरस्कारों की जानकारी नीचे दी गई है -

साल 1966 में स्टीफन हॉकिंग को एडम्स पुरस्कार दिया गया था. इस पुरस्कार के बाद इन्होंने साल 1975 में एडिंगटन पदक और साल 1976 में मैक्सवेल मेडल एंड प्राइज मिला था.

हेइनीमान पुरस्कार (Heineman Prize) हॉकिंग को साल 1976 में दिया गया था. इस पुरस्कार को पाने के बाद इन्हें साल 1978 में एक ओर पुरस्कार से नवाजा गया था और इस पुरस्कार का नाम अल्बर्ट आइंस्टीन मेडल था.

साल 1985 में हॉकिंग को आरएएस गोल्ड मेडल और साल 1987 डिराक मेडल ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल भी दिया गया था. इसके बाद सन् 1988 में इस महान वैज्ञानिक को वुल्फ पुरस्कार भी दिया गया था.

प्रिंस ऑफ अस्टुरियस अवार्ड भी हॉकिंग ने साल 1989 में अपने नाम किया था. इस अवार्ड को मिलने के कुछ समय बाद इन्होंने एंड्रयू जेमेंट अवार्ड (1998), नायलोर पुरस्कार और लेक्चरशिप (1999) भी दिया गया था.

साल 1999 में जो अगला पुरस्कार इन्हें मिला था उसका नाम लिलाइनफेल्ड पुरस्कार (Lilienfeld Prize) था और रॉयल सोसाइटी ऑफ आर्ट की तरफ से इसी साल इन्हें अल्बर्ट मेडल भी दिया गया था.

ऊपर बताए गए अवार्ड के अलावा इन्होंने कोप्ले मेडल (2006), प्रेसिडेंटियल मेडल ऑफ फ्रीडम (2009), फंडामेंटल फिजिक्स प्राइज (2012) और बीबीवीए फाउंडेशन फ्रंटियर्स ऑफ नॉलेज अवार्ड (2015) भी दिया गया हैं.

स्टीफन हॉकिंस और फिल्म

साल 2014 में स्टीफन हॉकिंग की प्रेरक जिंदगी पर आधारित फिल्म 'द थिअरी ऑफ एवरीथिंग' रिलीज हुई थी। जिसमें एडी रेडमैन ने हॉकिंग का किरदार अदा किया था और फेलिसिटी जोन्स ने प्रमुख भूमिका निभाई।

स्टीफन हॉकिंग द्वारा लिखी गई किताबें

स्टीफन हॉकिंग ने अपने जीवन काल में कई किताबें भी लिखी हैं और उनकी ये किताब अंतरिक्ष के विषय में ही लिखी गई है. नीचे हमने उनके द्वारा लिखी गई कुछ किताबों की जानकारी दी है -

‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’:
हॉकिंग द्वारा लिखी गई सबसे पहली किताब का नाम ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ था. ये किताब बिग बैंग और ब्लैक होल के विषय पर आधारित थी और साल 1988 में प्रकाशित हुई ये किताब 40 भाषाओं में उपलब्ध है.


‘द यूनिवर्स इन ए नटशेल’ : ये किताब साल 2001 में प्रकाशित की गई थी और हॉकिंग द्वारा लिखी गई इस किताब को साल 2002 में एवेंटिस प्राइस ऑफ साइंस बुक्स मिला था.

“द ग्रैंड डिज़ाइन”: हॉकिंग द्वारा लिखी गई “द ग्रैंड डिज़ाइन” किताब साल 2010 में प्रकाशित हुई थी और इस किताब में भी अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी दी गई थी. ये किताब भी काफी सफल किताब साबित हुई थी.

‘ब्लैक होल और बेबी यूनिवर्स’ :
ये किताब साल 1993 में आई थी और इस पुस्तक में हॉकिंग द्वारा ब्लैक होल से संबंधित लिखे गए निबंधों और व्याख्यानों का जिक्र था. इसके अलावा हॉकिंग ने बच्चों के लिए भी एक किताब लिखी थी. जिसका नाम ”जॉर्ज और द बिग बैंग” था और ये किताब साल 2011 में आई थी.

स्टीफन हॉकिंग की कुल संपत्ति

इंग्लैंड के कैम्ब्रिज शहर में स्टीफन हॉकिंग का खुद का एक घर है और इस वक्त उनके पास कुल $ 20 मिलियन की संपत्ति है. उन्होंने ये संपत्ति अपने कार्य, पुरस्कारों और किताबों के जरिए कमाई हैं। 

निधन

एक परिवार के प्रवक्ता के मुताबिक, 14 मार्च 2018 की सुबह सुबह अपने घर कैंब्रिज में 'हॉकिंग की मृत्यु हो गई थी। स्टीफन हॉकिंग के बच्चों लुसी, रॉबर्ट और टिम ने उनके दुःख व्यक्त करने वाले एक बयान जारी किया था। वह 76 वर्ष के थे। वह 55 साल से मोटर न्यूरॉन बीमारी से पीड़ित थे।

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के अनमोल विचार

  • ऊपर सितारों की तरफ देखो अपने पैरों के नीचे नहीं। जो देखते हो उसका मतलब जानने की कोशिश करो और आश्चर्य करो की क्या है जो ब्रह्माण्ड का अस्तित्व बनाये हुए है। उत्सुक रहो।
  • चाहे ज़िन्दगी जितनी भी कठिन लगे, आप हमेशा कुछ न कुछ कर सकते हैं और सफल हो सकते हैं।
  • मैंने देखा है वो लोग भी जो ये कहते हैं कि सब कुछ पहले से तय है , और हम उसे बदलने के लिए कुछ भी नहीं कर सकते, वे भी सड़क पार करने से पहले देखते हैं।
  • बुद्धिमत्ता बदलाव के अनुरूप ढलने की क्षमता है।
  • विज्ञान केवल तर्क का अनुयायी नहीं है, बल्कि रोमांस और जूनून का भी।
  • यदि आप हमेशा गुस्सा या शिकायत करते हैं तो लोगों के पास आपके लिए समय नहीं रहेगा।
  • अन्य विकलांग लोगों के लिए मेरी सलाह होगी , उन चीजों पर ध्यान दें जिन्हे अच्छी तरह से करने से आपकी विकलांगता नहीं रोकती , और उन चीजों के लिए अफ़सोस नहीं करें जिन्हे करने में ये बाधा डालती है। आत्मा और शरीर दोनों से विकलांग मत बनें।

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